बिना डेंटल कॉलेज के ही सीधे पीजी कराएगा मेडिकल कॉलेज,शासन से मिली अनुमति, विवि ने किया निरीक्षण, नेशनल डेंटल काउंसिलंग की स्वीकृति का इंतजार
रीवा मेडिकल कॉलेज इतिहास रचने की तैयारी कर रहा है। आधी लड़ाई लड़ चुका है। अब सिर्फ स्वीकृत का इंतजार है इसके बाद इतिहास के पन्नों में रीवा मेडिकल कॉलेज का नाम दर्ज हो जाएगा। ऐसा करने वाला पहला कॉलेज बन जाएगा। इसके पहले एम्स को छोड़कर ऐसी व्यवस्था कहीं नहीं है। श्याम शाह मेडिकल कॉलेज में अभी सिर्फ एमबीबीएस की ही पढ़ाई होती है। इसी से जुड़े विषयों में पीजी कराई जाती है। मेडिकल कॉलेज में सिर्फ डेंटल विभाग है लेकिन डेंटल में डिग्री नहीं मिलती। यहां यूजी पाठ्यक्रम संचालित नहीं है। संजय गांधी अस्पताल में मरीजों की सुविधा के हिसाब से और कॉलेज में पठन पाठन के हिसाब से सिर्फ डेंटल विभाग संचालित किया जा रहा है। अब यही डेंटल विभाग नया इतिहास रचेगा। इसकी तैयारियां चल रही है। डेंटल विभाग यूजी नहीं सीधे पीजी कराएगा। पीजी की चार सीटों की अनुमति के लिए एनडीसी को पत्र भेजा है। यदि हरी झंडी मिल गई तो सीधे पीजी कोर्स संचालित करने वाला मप्र और देश का पहला कॉलेज बन जाएगा। हालांकि मेडिकल कॉलेज में कहीं ऐसा नहीं है लेकिन एम्स सीधे डेंटल में पीजी जरूर कराता है लेकिन वहां के नियम कायदे कॉलेजों से अलग चलते हैं।श्याम शाह मेडिकल कॉलेज में डेंटल में पीजी की पढ़ाई शुरू करने के लिए प्रस्ताव आयुर्विज्ञान विवि जबलपुर के पास भी भेजा गया था। विवि से एक टीम निरीक्षण करने आई थी। टीम ने किसी तरह की आपत्ति दर्ज नहीं की लेकिन यह जरूर कर पहले इसके नियम कायदे एनडीसी से पता कर लें। यदि वह ओके हो जाएगा तो अनुमति दे दी जाएगी। अब एनडीसी का पत्र लिखा गया है। जवाब आने का इंतजार किया जा रहा है।डेंटल में पीजी की शुरुआत के लिए यूजी पाठ्यक्रम अनिवार्य है। रीवा में डेंटल कॉलेज नहीं है। डेंटल कॉलेज के बिना पीजी पाठ्यक्रम संचालित नहीं किया जा सकता। यही वजह है कि ऐसा करने वाला रीवा श्याम शाह मेडिकल कॉलेज पहला कॉलेज बन जाएगा। ऐसा एम्स में चल रहे पाठ्यक्रम को देखते हुए निर्णय लिया गया है। पत्राचार का दौर जारी है। शासन से हालांकि इसकी स्वीकृति मिल चुकी है। वर्तमान समय में डेंटल कॉलेज में प्रोफेसर, असिस्टेंट और ऐसोसिएट प्रोफेसर के अलावा इंटर्न हैं। यहां मरीजों की संख्या ज्यादा पहुंचती है। विंध्य से मरीज दांत से संबंधित बीमारियों का इलाज कराने पहुंचते हैं। ऐसे में यदि पीजी कोर्स शुरू करने की अनुमति मिलती है तो चार डॉक्टर मिल जाएंगे। इससे इलाज और सुविधओं में भी इजाफा हो जाएगा। चार सीटों से शुरुआत करने की प्लानिंग की गई है


















